जैविक तरल खाद: तैयार करें बहुत ही आसान विधि से:-
परिचय:
जैविक खेती आज की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित भोजन और टिकाऊ कृषि प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग ने जहां मिट्टी की उर्वरता को कमजोर किया है, वहीं लागत भी बढ़ा दी है। ऐसे समय में घर पर बनी जैविक तरल खाद किसानों के लिए एक बेहद सरल, सस्ता और प्रभावी समाधान साबित होती है।
डॉ. राजीव दीक्षित द्वारा सुझाई गई पारंपरिक देसी विधियाँ न केवल मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाती हैं, बल्कि फसलों को प्राकृतिक पोषण भी प्रदान करती हैं। गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और जीवंत मिट्टी से बना तरल खाद मिट्टी को पुनर्जीवित करता है, जबकि सरसों की खली से तैयार खाद फसलों को अतिरिक्त शक्ति देकर फूल–फल आने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करती है।
यह लेख आपको इन दोनों प्रकार की जैविक तरल खादों को घर पर आसानी से तैयार करने की पूरी विधि, आवश्यक सामग्री, उपयोग और लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा- ताकि आप कम लागत में अधिक स्वास्थ्यवर्धक, प्राकृतिक और गुणवत्तापूर्ण फसल प्राप्त कर सकें।
1) गोबर का जैविक तरल खाद:
जैविक खेती में मिट्टी की उर्वरता और फसल के प्राकृतिक विकास के लिए घर पर बनी जैविक खाद का उपयोग बेहद लाभकारी होता है। नीचे दिया गया फार्मूला डॉक्टर राजीव दीक्षित जी द्वारा सुझाया गया एक अत्यंत सरल और प्रभावी तरीका है, जिसे किसान भाई कम खर्च में आसानी से तैयार कर सकते हैं।
आवश्यक सामग्री:
यह मात्रा 1 एकड़ के लिए पर्याप्त है।
पदार्थ | मात्रा
गोमूत्र (जिस पशु का गोबर है) 10 लीटर
गुड़ 1 किलोग्राम
बेसन (दाल का आटा) 1 किलोग्राम
मिट्टी (पीपल/बरगद के नीचे की) 1 किलोग्राम
पानी (यदि आवश्यकता हो) 2 लीटर तक
बनाने की विधि:
मिश्रण तैयार करना:
- किसी बड़े टब, ड्रम या पात्र में गोबर और गोमूत्र को अच्छी तरह घोलें।
- अब इसमें गुड़, बेसन (दाल का आटा) और पीपल/बरगद के नीचे की जीवंत मिट्टी डालें।
- लकड़ी के दंड या प्लास्टिक की लाठी से मिश्रण को अच्छे से चलाएं।
- यदि घोल अधिक गाढ़ा हो और चलाने में दिक्कत हो, तो 2 लीटर पानी मिला सकते हैं। (मिश्रण करने में दिक्कत आ रही हो तभी पानी मिलाएं)
मिश्रण को खमीर उठने तक रखें:- तैयार मिश्रण को 15 दिनों के लिए ठंडी व छायादार जगह पर रखें जहां धूप नहीं लगती हो।
- पात्र को किसी कपड़े से ढक दें ताकि हवा आती-जाती रहे लेकिन धूल-मिट्टी न जाए।
- 15 दिनों में मिश्रण पूरी तरह उपद्रव बन कर उपयोग के लिए तैयार हो जाएगा।
- अब उसको अच्छी तरह मिक्स करें।
जैविक खाद का उपयोग: उपयोग विधि:
- 15 दिन बाद तैयार घोल में 200 लीटर पानी मिलाएं।
- इसे खेत में पहली जुताई के 1 से 2 दिन बाद या बीज बोने से 3 से 4 दिन पहले छिड़कें फिर बुआई करें।
दूसरी बार उपयोग:
- फसल की बुआई के 21वें दिन पर दुसरी बार सिंचाई के साथ उपयोग करें।
आगे का उपयोग:
- हर 21 दिन पर फसल तैयार होने तक इसी चक्र को बार-बार दोहराएं।
इस विधि के लाभ:- महंगे रासायनिक खाद की पूरी तरह से आवश्यकता खत्म हो जाती है।
- मिट्टी की उर्वरता, सूक्ष्मजीव और भूमि की शक्ति बढ़ती है।
- पौधों की वृद्धि तेज, स्वस्थ और प्राकृतिक होती है।
- उत्पादन लागत घटती है और गुणवत्ता बेहतर होती है।
2) सरसों की खली से जैविक तरल खाद बनाने की विधि:
आवश्यक सामग्री-
यह मात्रा 1 एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त है
- सरसों की खली: 1 किलोग्राम
- पुराना गुड़: 200 ग्राम
- मिट्टी: 200 Gm (पीपल या बरगद के नीचे का)
- पानी: 10 लीटर
बनाने की विधि:- 10 लीटर पानी में 1 किलोग्राम सरसों की खली को भिगा दें
- फिर उसमें 200 ग्राम गुड़ मिलाएं
- 200 ग्राम मिट्टी मिलाएं
- अब इसको 48 घंटों तक कपड़े से ढक कर छांव में रख दें और रोज सुबह-शाम चलाते रहें।
- 2 दिन बाद उसको अच्छी तरह से मसले फिर उसमें 1:10 लीटर की मात्रा में पानी मिलाएं।
- जैसे 10 लीटर का घोल तैयार है तो उसमें कम से कम 100 लीटर या अधिकतम 200 लीटर तक पानी और मिला लें।
उपयोग करने की विधि:
- अब आप उस जैविक तरल पदार्थ को सिंचाई की तरह फसलों में उपयोग कर सकते हैं।
- यह तरल जैविक पदार्थ फ़सलों को ग्रोथ बूस्टर के रूप में कार्य करने के लिए किया जाता है
- इस जैविक तरल पदार्थ (खाद) को सर्दियों में उपयोग करें।
- क्योंकि सरसों की खली की तासीर गर्म होती इस लिए सर्दियों में यह पौधों को सभी जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है।
- इस जैविक तरल पदार्थ से पौधे में अच्छा फूल व फल आता है।
मटका खाद (Matka Khad):
यह एक सस्ती और प्रभावी जैविक खाद है, जिसे गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और पानी से मिट्टी के मटके (घड़े) में तैयार किया जाता है, जिसमें लाभकारी सूक्ष्मजीव पनपते हैं और यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर फसलों को पोषण देती है, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है और उपज बढ़ती है. इसे तैयार करने के लिए गोबर, गोमूत्र, पानी, गुड़ और बेसन को मिलाकर मटके में 7-15 दिनों तक सड़ाया जाता है और फिर फसल में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फसलें स्वस्थ और रसायन-मुक्त बनती हैं।
सामग्री (लगभग 100 लीटर के लिए):
- गाय का गोबर: 15 किलो
- गोमूत्र: 15 लीटर
- पानी: 15 लीटर (या आवश्यकतानुसार)
- गुड़: 250 से 500 ग्राम
- बेसन (चने का): 250-500 ग्राम (वैकल्पिक, पर अनुशंसित)
- नीम की पत्तियां: कुछ मुट्ठी (कीटनाशक गुण के लिए, वैकल्पिक)।
बनाने की विधि:
मटका तैयार करें:
एक बड़े मिट्टी के मटके (घड़े) के निचले हिस्से में एक छोटा छेद करें और उसे मिट्टी से बंद कर दें (या सीधे मटके का उपयोग करें)।
मिश्रण बनाएं:
मटके में सबसे पहले गोबर, फिर गोमूत्र और पानी डालें. इसके बाद गुड़ और बेसन (अगर इस्तेमाल कर रहे हैं) को पानी में घोलकर डालें, नीम की पत्तियां भी मिला सकते हैं।
मिलाएं और ढकें: लकड़ी की सहायता से इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं और मटके के मुंह को सूती कपड़े या पट्टी से ढक दें।
सड़न प्रक्रिया (Fermentation):
मिश्रण को 7 से 10 दिनों (गर्मियों में 7 दिन, सर्दियों में 15 दिन) तक छायादार जगह पर रखें. हर दिन सुबह-शाम लकड़ी से घोल को हिलाएं।
उपयोग करें:
7 से 10 दिन बाद यह खाद तैयार हो जाएगी और इसे 200 से 400 लीटर पानी में घोलें और छानकर ड्रिप सिंचाई के साथ या छिड़काव विधि से फसलों पर प्रयोग करें। इसे हर 15 दिन में दोहराया जा सकता है।
फायदे (लाभ):
- मिट्टी में लाभकारी जीवाणुओं को बढ़ाता है।
- मिट्टी की उर्वरता और संरचना में सुधार करता है।
- नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम जैसे पोषक तत्व पौधों को आसानी से उपलब्ध कराता है।
- फसल उत्पादन बढ़ाता है और फसलों को स्वस्थ रखता है।
- रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करता है, जिससे जहर-मुक्त खेती होती है।
🔶️ मेरा व्यावहारिक सुझाव 🔶️
1️⃣ ताज़ा सामग्री का उपयोग करें:
गोबर और गोमूत्र जितना ताज़ा होगा, उतने अधिक जीवाणु सक्रिय रहेंगे और खाद अधिक प्रभावी बनेगी।
2️⃣ धातु के पात्र का उपयोग न करें:
प्लास्टिक, मिट्टी या सीमेंट के टैंक का उपयोग करें। लोहे या एल्यूमिनियम के बर्तन रासायनिक प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
3️⃣ रोजाना हिलाना न भूलें:
खमीर प्रक्रिया के दौरान सुबह-शाम लकड़ी की डंडी से मिश्रण चलाने से ऑक्सीजन मिलती है और सूक्ष्मजीव सक्रिय रहते हैं।
4️⃣ छांव वाली जगह पर रखें:
सीधी धूप से सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकते हैं, इसलिए हमेशा छायादार स्थान का चयन करें।
5️⃣ छानकर उपयोग करें (ड्रिप के लिए):
यदि ड्रिप सिंचाई में उपयोग कर रहे हैं तो घोल को पतले कपड़े से छान लें, ताकि पाइप जाम न हों।
6️⃣ फसल के अनुसार मात्रा समायोजित करें:
सब्जी, अनाज और बागवानी फसलों में आवश्यकता अलग हो सकती है, इसलिए पहले छोटे क्षेत्र में परीक्षण करें।
7️⃣ सरसों खली का प्रयोग मौसम अनुसार करें:
इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे मुख्यतः सर्दियों में उपयोग करना बेहतर रहता है।
8️⃣ रासायनिक खाद के साथ तुरंत मिश्रण न करें:
यदि पहले से रासायनिक खाद उपयोग कर रहे हैं, तो 10 से 15 दिन का अंतर रखें।
❓FAQs: लोगों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-
Q1) क्या यह खाद सभी फसलों के लिए उपयोगी है?
👉 Ans) हाँ, यह खाद अनाज, दाल, सब्ज़ी, फल और बागवानी फसलों में उपयोगी है।
Q2) क्या रासायनिक खाद पूरी तरह बंद की जा सकती है?
👉 Ans) नियमित उपयोग से रासायनिक खाद की आवश्यकता काफी हद तक कम या समाप्त की जा सकती है।
Q3) खाद कितने दिन तक सुरक्षित रख सकते हैं?
👉 Ans) तैयार घोल को 30 दिन के अंदर उपयोग कर लेना बेहतर है। अधिक समय रखने पर सूक्ष्मजीव सक्रियता घट सकती है।
Q4) क्या बारिश के मौसम में उपयोग किया जा सकता है?
👉 Ans) हाँ, लेकिन तेज बारिश से ठीक पहले छिड़काव न करें, अन्यथा घोल बह सकता है।
Q5) क्या बदबू आना सामान्य है?
👉 Ans) हाँ, खमीर प्रक्रिया के दौरान हल्की गंध सामान्य है। यदि अत्यधिक सड़ांध हो तो अनुपात दोबारा जांचें।
Q6) क्या देशी गाय का गोबर जरूरी है?
👉 Ans) देशी गाय का गोबर अधिक लाभकारी माना जाता है, परंतु अन्य पशुओं का ताज़ा गोबर भी उपयोग किया जा सकता है।
Q7) मटका खाद और ड्रम खाद में क्या अंतर है?
👉 Ans) मटका खाद में मिट्टी के बर्तन के कारण सूक्ष्मजीवों की सक्रियता अधिक मानी जाती है, जबकि ड्रम विधि बड़े स्तर पर उपयोग के लिए सुविधाजनक है।
📌 निष्कर्ष:
जैविक खेती में घर पर बनी तरल जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता, पौधों की वृद्धि और फसल की गुणवत्ता बढ़ाने का सबसे आसान, सस्ता और प्रभावी तरीका है। डॉक्टर राजीव दीक्षित द्वारा सुझाई गई यह खाद न केवल जमीन में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाती है, बल्कि फसल को प्राकृतिक रूप से पौष्टिक तत्व भी प्रदान करती है। गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और जीवंत मिट्टी से बने घोल में प्राकृतिक खमीर प्रक्रिया के कारण अत्यंत शक्तिशाली जैविक खाद तैयार होती है, जिसे किसी भी फसल पर आसानी से उपयोग किया जा सकता है।
इसी प्रकार, सरसों की खली से बनी जैविक तरल खाद विशेष रूप से सर्दियों की फसलों के लिए एक उत्कृष्ट ग्रोथ बूस्टर है। यह पौधों को नाइट्रोजन, पोटाशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति कर स्वस्थ फूल व फल देने में मदद करती है।
इसी प्रकार मटका तरल खाद बनाने की बहुत ही सरल विधि है।
तीनों विधियां बेहद कम लागत वाली होने के साथ-साथ रासायनिक खादों से पूरी तरह मुक्त हैं, जिससे किसान मिट्टी की ताकत को बनाए रखते हुए प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त कर सकते हैं। नियमित रूप से इन जैविक तरल खादों का उपयोग करने पर उत्पादन बढ़ता है, लागत कम होती है और फसल अधिक स्वास्थ्यवर्धक तथा सुरक्षित बनती है।
✍️ लेखक परिचय:
मैं सी.एल. साहनी, कृषि एवं जैविक खेती सलाहकार,
यह लेख प्राकृतिक खेती और कम लागत वाली कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हमारा प्रयास है कि किसानों तक सरल, व्यवहारिक और वैज्ञानिक रूप से उपयोगी जानकारी पहुँचे, जिससे वे रसायन-मुक्त, टिकाऊ और लाभकारी खेती कर सकें।
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मेरा मिशन:
“स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ फसल, स्वस्थ किसान, स्वस्थ भारत”
कृषि एवं जैविक खेती सलाहकार
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