Organic Pea Farming
मटर की जैविक खेती:
परिचय:
मटर भारत में रबी सीजन की सबसे लोकप्रिय, पौष्टिक और आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद सब्जी वाली फसलों में से एक है। इसमें प्रोटीन, आयरन, मिनरल्स और विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जैविक खेती के बढ़ते रुझानों ने मटर की खेती को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है, क्योंकि मटर स्वयं मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।
मटर भारत में रबी सीजन की सबसे लोकप्रिय, पौष्टिक और आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद सब्जी वाली फसलों में से एक है। इसमें प्रोटीन, आयरन, मिनरल्स और विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जैविक खेती के बढ़ते रुझानों ने मटर की खेती को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है, क्योंकि मटर स्वयं मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।
प्रिय किसान भाइयों यदि खेती को प्राकृतिक और जैविक तरीके से व्यवसायिक खेती के रूप में की जाए, तो उत्पादन अधिक, लागत कम और मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। मेरा यह लेख आपको मटर की जैविक खेती की संपूर्ण जानकारी प्रदान करती है- इसमें किस्मों से लेकर बुवाई, खाद, सिंचाई, रोग-कीट नियंत्रण और उपज तक की सभी प्रकार की विस्तृत जानकारी प्रदान कर रहे हैं।
मटर की जैविक खेती की महत्वपूर्ण जानकारियां:-
मटर की जैविक खेती की महत्वपूर्ण जानकारियां:-
मटर के लिए उपयुक्त जलवायु:
जैविक मटर की खेती ठंडे और शुष्क मौसम में की जाती है। इसके लिए...
- तापमान: 10°C से 25°C तक उपयुक्त रहता है।
- अंकुरण के लिए: 12 से 15°C
- फूल और फली बनने के समय: 15 से 20°C सबसे अच्छ रहता है।
- पाला पड़ने पर: हल्की सिंचाई करें, वरना फसल को नुकसान हो सकता है।
मटर के लिए उपयुक्त मिट्टी:
मटर की फसल के लिए सर्वोत्तम मिट्टी-
मटर की मुख्य किस्में:
- दोमट मिट्टी (Loamy Soil)।
- pH मान: 6.0 से 7.5 होना चाहिए।
- खेत अच्छा जल निकास वाला होना चाहिए।
मटर की मुख्य किस्में:
सब्जी वाली मटर:
जैविक खेत की तैयारी:
- अर्का प्रगति
- अर्का कार्तिक
- आजाद पी-1
- पंजाब-89
- VRP-5
- PSM-3
- बोनविल
- रचना
- HFP-4
- पंत P-5
- केपीएमआर-400
- वी एल मटर-7
- वी एल मटर-8
जैविक खेत की तैयारी:
मटर की जड़ें बहुत मुलायम होती हैं, इसलिए खेत भुरभुरा और अच्छी एवं ढेले रहित होना चाहिए।
खेत तैयारी के स्टेप:
- पहली गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें।
- उसके बाद 1 से 2 बार हल्की जुताई करें और पाटा चलाएं।
- खेत समतल और अच्छी जल निकासी वाला होना चाहिए।
- उठी क्यारियां बनाना बेहतर रहता है।
जैविक खाद प्रबंधन:
मटर की फसल को बहुत अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन शुरुआती विकास के लिए जैविक खाद अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रति एकड़ खाद की मात्रा:
- गोबर की सड़ी खाद / वर्मी कम्पोस्ट: 10 से 12 क्विंटल।
- नीम की खली: 25 से 30 किलो पर्याप्त है।
- ह्यूमिक एसिड / जीवामृत: 200 लीटर (महीने में 2 बार)
- घनजीवामृत: 60 से 80 किलो।
- राइजोबियम कल्चर: जड़ों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- अंतिम जुताई के समय जैविक खाद खेत में समान रूप से फैलाएं।
- नीम की खली मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं ताकि कीट और मिट्टी जनित रोग कम हों।
- जीवामृत बुवाई के 7 से 10 दिन बाद डालें।
बीज की मात्रा:
- सब्जी मटर: 40 से 45 किलो/एकड़
- दाने वाली मटर: 30 से 35 किलो/एकड़
1) रोगों से बचाव के लिए-
बुवाई की विधि:
- ट्राइकोडर्मा विरिडे: 5 ग्राम/प्रति किलो बीज
- राइजोबियम संवर्धन:15 से 20 ग्राम/प्रति किलो बीज।
- स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस: 5 से 7 ग्राम/प्रति किलो बीज।
- बीज को हल्का गीला करें।
- अब सभी जैविक पाउडर मिलाकर कोटिंग करें।
- छाया में 30 मिनट सुखाकर बुवाई करें।
बुवाई की विधि:
पंक्ति की दूरी और बीज की दूरी:
जैविक सिंचाई प्रबंधन:
- पंक्ति से पंक्ति की दूरी- 30 से 45 सेमी।
- पौधे से पौधे की दूरी- 6 से 8 सेमी।
- गहराई 2 से 3 सेमी तक रखें (गहरी बुवाई नुकसान करती है)
- सीड ड्रिल
- हाथ से लाइन में बुवाई करें।
- बेड बना कर (उठी क्यारियों पर) बुवाई करें।
जैविक सिंचाई प्रबंधन:
मटर में अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती।
अतिरिक्त पानी से जड़ सड़न की समस्या होती है।
अतिरिक्त पानी से जड़ सड़न की समस्या होती है।
सिंचाई करने का सही समय:
- अंकुरण के बाद 20 से 21 दिन पर
- दोबारा सिंचाई फूल आने पर करें।
- तीसरी सिंचाई फली बनते समय जरूर करें।
- ठंड के मौसम में शाम की सिंचाई से पाला रुकता है।
- पानी खेत में कभी खड़ा न रहने दें।
- ड्रिप सिंचाई सर्वोत्तम है।
मटर के साथ खरपतवार बहुत तेजी से बढ़ते हैं।
खरपतवार खेत से सभी पोषक तत्व छीन लेते हैं।
खरपतवार खेत से सभी पोषक तत्व छीन लेते हैं।
जैविक उपाय:
- पहली निराई: 20 से 25 दिन बाद करें।
- दूसरी निराई: 45 दिन बाद करें।
- मल्चिंग: सूखी घास या फसल अवशेष जैसे पूवाल बिछाएं ।
- हाथ से निराई-गुड़ाई करें ।
1. पत्ती लपेटक कीट के लिए-
जैविक समाधान:
- नीमास्त्र- 4 लीटर/200 लीटर पानी
- बवेरिया बैसियाना- 5 ग्राम/लीटर का छिड़काव करें।
जैविक उपाय:
- दशपर्णी अर्क- 8 लीटर/200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें या
- लहसुन + मिर्च स्प्रे (5% घोल) का छिड़काव करें।
छोटे काले-हरे कीट रस चूसते हैं।
जैविक नियंत्रण:
- 5% नीम तेल + साबुन घोल कर छिड़काव करें।
- गोमूत्र + नीम पत्ती अर्क का छिड़काव करें
1. झुलसा रोग-
उपाय:
- स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस- 10 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। या
- ट्राइकोडर्मा- 5 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
पत्तियों पर सफेद चूर्ण की तरह धूल दिखाई देती है।
उपाय:
- 5% गोमूत्र का स्प्रे करें ।
- बेकिंग सोडा- 5 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
उपाय:
- ट्राइकोडर्मा का मिश्रण मिट्टी में डालें।
- खेत से पानी की निकासी बढ़ाएं।
मटर की तोड़ाई कब करें?:
- बोने के 60 से 75 दिन बाद तुड़ाई शुरू होती है।
- फली गहरे हरे रंग की होनी चाहिए।
- दाना मुलायम और गोल होना चाहिए।
- सुबह या शाम में तुड़ाई करें।
- हर 3 से 4 दिन में तुड़ाई करें ।
जैविक खेती में मटर की औसत उपज-
सब्जी वाली मटर:
मटर की जैविक खेती में विशेष लाभ:
- 40 से 45 क्विंटल/एकड़ मिल जाती है।
- 12 से 15 क्विंटल/एकड़ तक मिल जाती है।
मटर की जैविक खेती में विशेष लाभ:
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
- खेत में नाइट्रोजन क्षमता बढ़ती है
- कीटनाशक अवशेष शून्य रहते हैं
- लागत कम आती है
- उच्च गुणवत्ता वाली सब्जी बाजार में ज्यादा दाम पर बिकती है।
🔶️ मेरा व्यावहारिक सुझाव 🔶️
1️⃣ जल्दी पकने वाली किस्म चुनें- रोग सहनशील और कम अवधि वाली किस्में जैविक खेती में अधिक लाभ देती हैं।
2️⃣ बीज उपचार को कभी न छोड़ें- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) द्वारा भी प्रमाणित है कि राइजोबियम व ट्राइकोडर्मा से उपचार करने पर उत्पादन बेहतर मिलता है।
3️⃣ उठी हुई क्यारियों (Raised Beds) पर बुवाई करें- इससे जल निकासी अच्छी रहती है और जड़ सड़न कम होती है।
4️⃣ नीम आधारित उत्पादों का नियमित उपयोग करें- 10-15 दिन के अंतराल पर नीमास्त्र या नीम तेल का छिड़काव कीटों को शुरुआती अवस्था में ही रोक देता है।
5️⃣ मल्चिंग अवश्य करें- सूखी घास या फसल अवशेष बिछाने से नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं।
6️⃣ फसल चक्र अपनाएं- मटर के बाद टमाटर या मिर्च जैसी फसल लगाने से मिट्टी की नाइट्रोजन का अच्छा उपयोग होता है।
7️⃣ ड्रिप सिंचाई अपनाएं- इससे पानी की बचत होती है और फसल स्वस्थ रहती है।
8️⃣ सुबह या शाम को स्प्रे करें- जैविक घोलों का छिड़काव तेज धूप में न करें।
9️⃣ नियमित निरीक्षण करें- हर 3-4 दिन में खेत का निरीक्षण करने से कीट-रोग की शुरुआती पहचान हो जाती है।
🔟 स्थानीय बाजार की मांग देखें- सब्जी वाली मटर को स्थानीय मंडी में अधिक दाम मिलते हैं।
❓FAQs: लोगों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-
Q1) मटर की बुवाई का सही समय क्या है?
👉 उत्तर: रबी सीजन में अक्टूबर से नवंबर के बीच बुवाई सबसे उपयुक्त रहती है।
Q2. क्या मटर की फसल में रासायनिक खाद की जरूरत होती है?
👉 उत्तर: नहीं, जैविक खेती में गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और राइजोबियम कल्चर पर्याप्त होते हैं।
Q3) मटर में सबसे सामान्य कीट कौन सा है?
👉 उत्तर: एफिड (चूसक कीट) सबसे सामान्य समस्या है, जिसे नीम तेल स्प्रे से नियंत्रित किया जा सकता है।
Q4) मटर की फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?
👉 उत्तर: सामान्यतः 60 से 75 दिनों में फली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है।
Q5) जैविक मटर की औसत उपज कितनी मिलती है?👉 उत्तर:
- सब्जी वाली मटर: 40 से 45 क्विंटल/एकड़
- दाने वाली मटर: 12 से 15 क्विंटल/एकड़
Q6) क्या जैविक मटर की बाजार में मांग अधिक है?
👉 उत्तर: हां, आजकल जैविक सब्जियों की मांग बढ़ रही है और अच्छी गुणवत्ता होने पर अधिक कीमत मिलती है।
Q7) क्या मटर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है?
👉 उत्तर: हां, मटर एक दलहनी फसल है जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण करके मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।
📌 निष्कर्ष:
मटर की जैविक खेती स्वास्थ्य, पर्यावरण और किसानों की आर्थिक स्थिति तीनों के लिए लाभदायक है। यदि किसान सही किस्में चुनें, बीज उपचार करें, समय पर सिंचाई और जैविक खाद का उपयोग करें, तो मटर की फसल कम लागत में अधिक उपज दे सकती है। जैविक खेती मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, फसल को पोषक बनाती है और खेत को लंबे समय तक उत्पादन देने योग्य बनाए रखती है।
इस विस्तृत गाइड के जरिए कोई भी किसान आसानी से सफल मटर की जैविक खेती कर सकता है।
✍️ लेखक संदेश:
प्रिय किसान भाइयों एवं पाठक मित्रों,
मैं पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती से जुड़ा हुआ हूँ और किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन के तरीके साझा करता रहा हूँ। मेरा उद्देश्य है कि किसान भाई रसायन मुक्त खेती अपनाकर अपनी मिट्टी, स्वास्थ्य और आय- तीनों को सुरक्षित रखें।
📢 किसान भाइयों,
यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे अपने किसान मित्रों के साथ अवश्य साझा करें।
आपके सुझाव और प्रश्न मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं- कृपया कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं।
“प्राकृतिक खेती अपनाएं - स्वस्थ भविष्य बनाएं।”
📌 आपकी सफलता ही हमारा लक्ष्य है।
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मेरा मिशन:
“स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ फसल, स्वस्थ किसान, स्वस्थ भारत”
धन्यवाद 🙏सी.एल. साहनी,कृषि एवं जैविक खेती सलाहकारBy: Good Lifecl Blog
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✔️ मटर की जैविक खेती की विस्तृत जानकारी- उपयुक्त किस्में, मिट्टी की तैयारी, जैविक खाद, बीज उपचार, सिंचाई, कीट-रोग नियंत्रण और उपज जानें। यह गाइड किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन पाने में मदद करेगी।



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